उपर्युक्त गद्यांश (आड़ावल) में किस पर्वतमाला की आत्मकथा है?
उपर्युक्त गद्यांश (आड़ावल) में किस पर्वतमाला की आत्मकथा है?
गद्यांश को ध्यान से पढ़ने पर यह स्पष्ट होता है कि यह पर्वतमाला स्वयं अपनी कहानी सुना रही है और अंत में कहती है 'आप मुझे आज अरावली कहते हो'। इससे स्पष्ट है कि यह अरावली पर्वतमाला की आत्मकथा है, विकल्प (2)।
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