कबीर का यह दोहा पढ़िए:
"बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥"
इस दोहे का मुख्य संदेश क्या है?
कबीर का यह दोहा पढ़िए:
"बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥"
इस दोहे का मुख्य संदेश क्या है?
चरण 1: पंक्तियों का भावार्थ: कवि कहता है कि जब मैं बुरा व्यक्ति खोजने निकला तो मुझे कोई बुरा नहीं मिला।
चरण 2: जब मैंने अपने मन में झाँककर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा कोई नहीं है।
चरण 3: अतः कवि आत्म-निरीक्षण की शिक्षा देता है: दूसरों पर उँगली उठाने से पहले स्वयं को सुधारिए।
चरण 4: अन्य विकल्प दोहे के भाव के विपरीत हैं या उसमें कहीं नहीं कहे गए।
उत्तर: हमें दूसरों को दोष देने से पहले अपने दोष देखने चाहिए।
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