मैं कौन हूँ? मैं परंपरा से जुलाहा था, निर्गुण भक्ति धारा का संत था और मेरी वाणी (साखी, सबद, रमैनी) "बीजक" में संकलित है। कवि को पहचानिए।
मैं कौन हूँ? मैं परंपरा से जुलाहा था, निर्गुण भक्ति धारा का संत था और मेरी वाणी (साखी, सबद, रमैनी) "बीजक" में संकलित है। कवि को पहचानिए।
चरण 1: संकेत एकत्र कीजिए: जुलाहा, निर्गुण भक्ति (निराकार ईश्वर की उपासना) और साखी, सबद, रमैनी वाला ग्रंथ "बीजक"।
चरण 2: बीजक कबीर की वाणी का संकलन है।
चरण 3: सूरदास और मीराबाई सगुण (कृष्ण) भक्त थे तथा तुलसीदास ने सगुण राम की स्तुति में रामचरितमानस रचा।
चरण 4: अतः तीनों संकेत केवल कबीर पर लागू होते हैं।
उत्तर: कबीर।
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