अभ्यास प्रश्न
Browse and practice real questions from previous scholarship exams. Use filters to narrow down by year, subject, or exam.
श्रुतिसम-भिन्नार्थक शब्द 'जलज-जलद' का सही अर्थ है –
निम्नलिखित में से तद्भव शब्द है –
निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए: 'ऋषि-मुनियों ने गहन चिंतन के बाद यह उद्घोष किया है - गावो विश्वस्य मातरः। भारतवर्ष में सदियों से गाय धन और धान्य की दात्री अर्थात एक उपयोगी पशु मात्र ही नहीं वरन् यहाँ के लोग उसे पवित्र और पूज्य मानकर अत्यन्त आस्था का भाव रखते हैं। गौधन के प्रति आदर भाव हमारी पुरातन संस्कृति का अटूट हिस्सा रहा है। द्वापर काल में गोपाल नाम से विख्यात श्रीकृष्ण स्वयं ग्वाला बनकर गौ सेवा करते दृष्टिगोचर होते हैं।' प्रश्न: 'गावो विश्वस्य मातरः' का उद्घोष किया है –
निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए: 'ऋषि-मुनियों ने गहन चिंतन के बाद यह उद्घोष किया है - गावो विश्वस्य मातरः। भारतवर्ष में सदियों से गाय धन और धान्य की दात्री अर्थात एक उपयोगी पशु मात्र ही नहीं वरन् यहाँ के लोग उसे पवित्र और पूज्य मानकर अत्यन्त आस्था का भाव रखते हैं। गौधन के प्रति आदर भाव हमारी पुरातन संस्कृति का अटूट हिस्सा रहा है। द्वापर काल में गोपाल नाम से विख्यात श्रीकृष्ण स्वयं ग्वाला बनकर गौ सेवा करते दृष्टिगोचर होते हैं।' प्रश्न: द्वापर काल में 'गोपाल' नाम से विख्यात हुए –
निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए: 'ऋषि-मुनियों ने गहन चिंतन के बाद यह उद्घोष किया है - गावो विश्वस्य मातरः। भारतवर्ष में सदियों से गाय धन और धान्य की दात्री अर्थात एक उपयोगी पशु मात्र ही नहीं वरन् यहाँ के लोग उसे पवित्र और पूज्य मानकर अत्यन्त आस्था का भाव रखते हैं। गौधन के प्रति आदर भाव हमारी पुरातन संस्कृति का अटूट हिस्सा रहा है। द्वापर काल में गोपाल नाम से विख्यात श्रीकृष्ण स्वयं ग्वाला बनकर गौ सेवा करते दृष्टिगोचर होते हैं।' प्रश्न: लोग पवित्र और पूज्य मानते हैं –