Previous Year Questions

अभ्यास प्रश्न

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मध्यम
. NMMS Rajasthan · MAT · 2017 . PYQ
Q. 63

गद्यांश:
छात्रावस्था में मित्रता की धुन सवार रहती है। मित्रता हृदय से उमड़ पड़ती है। पीछे के जो स्नेह बंधन होते हैं, उनमें न तो उमंग रहती है, न उतनी खिन्नता। बाल-मैत्री में जो मन को प्रसन्न करने वाला आनंद होता है, वह और कहाँ? कैसी मधुरता और कैसी अनुरक्ति होती है, कैसा आपसी विश्वास होता है! हृदय से कैसे-कैसे उद्गार निकलते हैं! वर्तमान कैसा आनंदमय दिखाई पड़ता है और भविष्य के संबंध में कैसी लुभाने वाली कल्पनाएँ मन में रहती हैं। कितनी जल्दी बातें लगती हैं और कितनी जल्दी मानना होता है।

प्रश्न: 'कितनी जल्दी बातें लगती हैं।' पंक्ति में रेखांकित शब्द का अभिप्राय है—

आसान
. NMMS Rajasthan · MAT · 2017 . PYQ
Q. 64

गद्यांश:
छात्रावस्था में मित्रता की धुन सवार रहती है। मित्रता हृदय से उमड़ पड़ती है। पीछे के जो स्नेह बंधन होते हैं, उनमें न तो उमंग रहती है, न उतनी खिन्नता। बाल-मैत्री में जो मन को प्रसन्न करने वाला आनंद होता है, वह और कहाँ? कैसी मधुरता और कैसी अनुरक्ति होती है, कैसा आपसी विश्वास होता है! हृदय से कैसे-कैसे उद्गार निकलते हैं! वर्तमान कैसा आनंदमय दिखाई पड़ता है और भविष्य के संबंध में कैसी लुभाने वाली कल्पनाएँ मन में रहती हैं। कितनी जल्दी बातें लगती हैं और कितनी जल्दी मानना होता है।

प्रश्न: छात्रावस्था में कौनसी धुन सवार रहती है—

मध्यम
. NMMS Rajasthan · MAT · 2017 . PYQ
Q. 65

गद्यांश:
छात्रावस्था में मित्रता की धुन सवार रहती है। मित्रता हृदय से उमड़ पड़ती है। पीछे के जो स्नेह बंधन होते हैं, उनमें न तो उमंग रहती है, न उतनी खिन्नता। बाल-मैत्री में जो मन को प्रसन्न करने वाला आनंद होता है, वह और कहाँ? कैसी मधुरता और कैसी अनुरक्ति होती है, कैसा आपसी विश्वास होता है! हृदय से कैसे-कैसे उद्गार निकलते हैं! वर्तमान कैसा आनंदमय दिखाई पड़ता है और भविष्य के संबंध में कैसी लुभाने वाली कल्पनाएँ मन में रहती हैं। कितनी जल्दी बातें लगती हैं और कितनी जल्दी मानना होता है।

प्रश्न: “बाल-मैत्री” में किस प्रकार का आनंद बताया गया है—

मध्यम
. NMMS Rajasthan · MAT · 2017 . PYQ
Q. 66

पद्यांश:
“सीस पगा न झगा तन पै प्रभु,
जाने को आहि, बसे केहि ग्रामा।
धोती फटी-सी लटी दुपटी अरु,
पाँव उपानहूँ की नहीं सामा।
द्वार खड़ो द्विज दुर्बल एक,
रह्यो चकि सो वसुधा अभिरामा।
पूछत दीनदयाल को धाम,
बतावत आपनो नाम सुदामा॥”

प्रश्न: 'पगा' का अर्थ है—

मध्यम
. NMMS Rajasthan · MAT · 2017 . PYQ
Q. 67

पद्यांश:
“सीस पगा न झगा तन पै प्रभु,
जाने को आहि, बसे केहि ग्रामा।
धोती फटी-सी लटी दुपटी अरु,
पाँव उपानहूँ की नहीं सामा।
द्वार खड़ो द्विज दुर्बल एक,
रह्यो चकि सो वसुधा अभिरामा।
पूछत दीनदयाल को धाम,
बतावत आपनो नाम सुदामा॥”

प्रश्न: 'दीनदयाल' शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है—